सूखे मेवे के सेवन से भी वजन को घटाया जा सकता है। इसमें किशमिश का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए ये स्लाइडशो पढ़े।
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किशमिश
किशमिश को सूखे मेवे का राजा कहा जाता है।किशमिश का सेवन सीधे तौर पर वजन घटाने के लिए नहीं होता है लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने में इसकी बड़ी भूमिका होती है। किशमिश को उसके पोषण तत्वों और स्वास्थ्य लाभों के कारण "हीरा" माना जाता है। किशमिश खाने से ब्लड बनता है, वायु, पित्त और कफ दोष दूर होता है। ये वजन घटाने में किस तरह से मदद करता है
एनर्जी देता है
किशमिश में मौजूद शर्करा शरीर में आसानी से पच जाती है| नतीजनत् शरीर को शक्ति और स्फूर्ति प्राप्त होती है। किशमिश पूरी तरह से कोलेस्ट्रॉल मुक्त होता है। किशमिश में घुलनशील फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। यह घुलनशील फाइबर बुरे कोलेस्ट्रॉल का विरोध करता है| इसके अलावा किशमिश पोलीफेनोल्स एंजाइम को भी दबाता है जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को अवशोषित के लिए जिम्मेदार होता है।
पाचन को ठीक रखता है
रोजाना किशमिश का सेवन करने से आपका हाजमा ठीक रहता है और पाचन तंत्र भी सुचारू रूप से कार्य करता है| किशमिश लैक्सटिव के रूप में कार्य करती है। यह पेट में जाकर पानी को अवशोषित करती है, जिसके फलस्वरूप कब्ज से राहत मिलती है| किशमिश में पाये जाने वाले फाइबर गैस्ट्रोइंटेस्टिनल मार्ग से विषाक्त और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
हड्डियों को मजबूत करता है
मोटे लोगो की हड्डियां कमजोर होती है। शरीर का ज्यादा वजन भी हड्डियों को कमजोर औऱ दुर्बल बनाता है। अगर आप वजन कम कर रहे हो तो सारे आहार वजन कम करने वाले नहीं लेने चाहिए, ये तरीका आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। आपको कुछ ऐसे आहार शामिल करने चाहिए जो आपको ऊर्जा दे सके। इसके लिए किशमिश सबसे बेहतर विकल्प है। अगर आप शक्कर बिल्कुल भी नहीं लेते हो तो भी किशमिश आपके शरीर में ग्लूकोज का स्तर बनाए रखती है। किशमिश कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है|
स्वस्थ रखता है
एक फिट व्यक्ति स्वस्थ रहता है। किशमिश सीधे तौर पर भले ही वजन कम करने में सहायक ना हो, लेकिन इससे मिलने वाले फासदे वजन को नियंत्रित करने में मदद करते है। उदाहरण के तौर पर रोजाना किशमिश खाने वाले व्यक्ति को हृ्दय से जुड़ी परेशानियों का सामना कम करना पड़ता है। किशमिश आपके शरीर में पीएच स्तर को भी संतुलित रखता है। आवश्यक मात्रा में किशमिश का सेवन आपके इम्यूनिटी सिस्टम को भी मजबूत बनाता है।
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रोज सुबह 1 गिलास अदरक और गाजर का जूस पीने से होंगे ये कमाल के फायदे ..!!
आज कल लोग खुद को फिट रखने के लिये इंटरनेट पर ढेर सारी रेसिपीज़ ढूंढा करते हैं, जिसमें से जूस या स्मूदी की रेसिपी नंबर 1 पर होती है। पियें 1 कप अदरक का जूस, मिलेगा गठिया, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल से छुटकारा अगर आप जिम जाती हैं या फिर नहीं भी जाती हैं, और खुद की सेहत का ख्याल रखती हैं, तो आपको गाजर और अदरक का जूस रोजाना ब्रेकफास्ट के साथ पीना चाहिये। इन दोनों ही सब्जियों में मिनरल्स, मल्टीविटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो पूरी सेहत के लिये फायदेमंद हैं। तो फिर देर किस बात ही अपना जूसर निकालिये और तैयार हो जाइये ताजा गाजर और अदरक का जूस बनाने के लिये।
इस जूस को टेस्टी बनाने के लिये आप इसमें अपनी इच्छा अनुसार हर्ब भी मिला सकती हैं। आइये जानते हैं इसे बनाने की विधि और स्वास्थ्य लाभ के बारे में। For More Visit https://www.healthtreatment.in
जूस बनाने का तरीका-
सामग्री-
• गाजर- 4 से 5
• अदरक- इंच
• नींबू- 1
• दालचीनी पावडर (वैकल्पिक)
• सेंधा नमक (वैकल्पिक)
कैसे बनाएं
गाजर और अदरक को छील कर धो लें।
फिर गाजर का जूस निकालें।
उसके बाद अदरक का भी जूस निकालें और उसे गाजर के जूस के साथ मिक्स कर के एक गिलास में निकालें। जूस में स्वाद बढ़ाने के लिये आधा नींबू निचोड़ें और चुटकीभर सेंधा नमक या दालचीनी पावडर मिक्स करें।
इसे रोजाना एक बार जरुर पियें, खासतौर पर नाश्ता करते वक्त।
अदरक और गाजर के जूस के फायदे –
इम्यूनिटी बढाए
यह जूस बूढे और बच्चों के लिये सबसे फायदेमंद होता है। गाजर में मौजूद विटामिन ए और सी प्रतिरक्षा कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करते हैं। इसी के साथ अदरक में भी एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ा कर गंदगी को बाहर निकालता है।
त्वचा को स्वस्थ बनाएं
गाजर का यह जूस पीने से त्वचा से दाग-धब्बे, मुंहासे, पिगमेंटेशन, झाइयां आदि मिटती हैं और स्किन टोन ठीक होता है।
कैंसर का खतरा नहीं होता
ताजा जूस पीने से कैंसर से बचाव होता है क्योंकि इसमें कैंसर विरोधी, एंटीऑक्सिडेंट, एंटीप्रोलीफेरेटिकव, एंटी इंफिलेमेट्री और विरोधी मेटास्टेटिक गुण पाए जाते हैं। अदरक अलग अलग तरह के कैंसर से लड़ सकता है जैसे, ओवेरियन, कोलोरेक्टल, लंग, ब्रेस्ट, स्किन, प्रोस्टेट और पैनक्रिएटिक कैंसर।
ह्रदय के लिये भी है अच्छा
अदरक और गाजर दोनों ही चीजों में एंटीऑक्सीडेंट और क्लीजिंग प्रॉपर्टी होती है, जो दिल की किसी भी बीमारी के लिये अच्छी मानी जाती है।
डायबिटीज़ कंट्रोल करे
वे लोग जिन्हें मधुमेह है या जिन्हें होने की शंका है, उनका अपनी डाइट में ये जूस जरुर शामिल करना चाहिये क्योंकि इसमें ढेर सारा एंटीऑक्सीडेंट होता है। अदरक तो वैसे भी ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है।
पेट के लिये भी लाभदायक है
अगर आपको पेट से संबन्धित कोई समस्या रहती है तो इसे जरुर पियें। इस जूस को पीने से पेट में कब्ज नहीं रहेगी।
कुछ जरुरी टिप्स
इस जूस को तुरंत बना कर पीना चाहिये क्योंकि देर तक रखने के बाद इसमें से पोषक तत्व खतम होने लगते हैं। अगर आप चाहें तो इस जूस में 1 हरा सेब भी डाल सकते हैं
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दालचीनी और शहद का मिश्रण है जुकाम से लेकर कैंसर और हार्ट अटैक तक का रामबाण इलाज..!!
आपने घर के मसालों की रानी, दालचीनी का उपयोग तो कई बार किया होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपकी हर बीमारी का इलाज करने में सक्षम है। और जब दालचीनी के साथ शहद का भी मेल हो जाए, फिर तो यह समझो सोने पर सुहागे वाली बात हो गई।
शहद और दालचीनी का मिश्रण कई बीमारियों का रामबाण इलाज़ माना जाता है | ये कई बिमारियों से हमे छुटकारा दिला सकता है | हजारों सालों से चलता आ रहा ये नुख्सा स्वास्थ्य विशेषज्ञों दुवारा भी प्रमाणित हो चूका है |
इजिप्ट वासी इस नुख्से का इस्तेमाल घावों को भरने के लिए, ग्रीक वासी इस का इस्तेमाल अपनी जीवनशेली को लम्बा बनाने के लिए और भारतीय कोग इस का इस्तेमाल अपने स्वास्थ्य को संतुलित बनाये रखने के लिए कई साल पहले से करते आ रहे है | For More Visit https://www.healthtreatment.in
अगर आप अब तक इसके गुणों से अनजान हैं, तो जरूर पढ़े दालचीनी और शहद के यह अनमोल गुण और उससे होने वाले फायदे –
1.कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए :- इस मिश्रण के माध्यम से आप बहत आसानी से अपने कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण कर सकते है | 1 कप पानी में 2 चमच शहद और 3 चमच दालचीनी मिला कर सेवन करने से 2 घंटे में आपका 10% कोलेस्ट्रॉल कम हो जयेगा |
2.ह्रदय रोग – हृदय को स्वस्थ बनाए रखने और हृदय रोगों पर नियंत्रण रखने में दालचीनी सहायक होती है, क्योंकि यह हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकती है। प्रतिदिन शहद और दालचीनी का गर्म पानी के साथ सेवन करें। आप दालचीनी और शहद के मिश्रण को रोटी के साथ भी खा सकते हैं। इसके अलावा दालचीनी को चाय में डालकर भी ले सकते हैं। इसके प्रयोग से हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है।
3.गठिए से राहत – जोड़ों में दर्द होने पर दालचीनी का प्रयोग आपको राहत देता है। इसके लिए प्रतिदिन दालचीनी का गर्म पानी में सेवन तो लाभप्रद है ही, इसके अलावा इस हल्के गर्म पानी की दर्द वाले स्थान पर मालिश करने से भी जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।
इसके पानी को पीने एक सप्ताह में संधिवात के दर्द से निजात मिलती है और एक महीने तक इका सेवन करने से चलने फिरने में असमर्थ लोग भी चलने में सक्षम हो जाते हैं। आर्थाइटिस के दर्द में भी दालचीनी काफी फायदेमंद साबित होती है।
4.पित्ते की इन्फेक्शन :– इस औषधि से पितते की इन्फेक्शन भी दूर हो जाये गी | अगर आप सामग्री की मात्रा को बडाना चाहते हो तो 2 चमच दालचीनी और एक या दो चमच शहद के उबले हुए पानी में डाल कर भी सेवन कर सकते है |
5.सर्दी-खांसी – सर्दी, खांसी या गले की तकलीफों में दालचीनी बेहद असरकारक दवा के रूप में काम करती है। इसे पीसकर एक चम्मच शहद के साथ एक चुटकी मात्रा में खाने से जुकाम में लाभ मिलता है। आप गर्म या गुनगुने पानी में दालचीनी के पाउडर को शहद के साथ मिलाकर पी सकते हैं। दालचीनी के पाउडर को पिसी हुई काली मिर्च के साथ सेवन करने से भी राहत मिलती है। इससे पुराने कफ में भी राहत मिलेगी।
6.पेट के रोग- अपच, गैस, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्यों में भी दालचीनी का पाउडर लेने से आराम मिलता है। इससे उल्टी-दस्त की समस्या में भी लाभ होता है, और भोजन का पाचन भी बेहतर होता है। शहद और दालचीनी के पावडर का मिश्रण लेने से पेट का अल्सर जड़ से ठीक हो जाता है।
7.कैंसर- दालचीनी का प्रयोग कैंसर जैसे रोग पर नियंत्रण पाने में सक्षम है। वैज्ञानिकों ने अमाशय के कैंसर और हड्डी के बढ़ जाने की स्थति में दालचीनी और शहद को लाभदायक बताया है। एक माह तक गरम पानी में दालचीनी पाउडर और शहद का सेवन इसके लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर बीमारियों से लड़ सके |
8.मोटापा – मोटापे के लिए दालचीनी का सेवन एक रामबाण उपाय है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करती है, जिससे मोटापा नहीं बढ़ता। इसके लिए दालचीनी की चाय बहुत फायदेमंद है। एक चम्मच दालचीनी पाउडर को एक गिलास जल में उबालकर आंच से उतार लें। इसके बाद उसमें दो बड़े चम्मच शहद मिलाकर सुबह नाश्ता करने से आधा घंटा पहले पिएं। रात को सोने से पहले भी इसका सेवन करना दुगुना फायदेमंद होता है, और अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।
9.सिर दर्द- ठंडी हवा लगने या सर्दी के कारण होने वाले सिरदर्द में दालचीनी का लेप करना फायदेमंद होता है। गर्मी के कारण होने वाले सिरदर्द में दलचीनी और तेजपत्ते को मिश्री के साथ चावल के पानी में पीसकर सूंघने से सिरदर्द दूर हो जाता है। इसके अलावा दालचीनी के तेल कुछ बूंदें, तिल के तेल में मिलाकर सिर पर मालिश करने से भी सिरदर्द ठीक हो जाती है।
दालचीनी को पानी में रगड़कर कनपटी पर गर्म लेप करने से भी आराम मिलता है। नियमित रूप से शहद और दालचीनी का सेवन करने से तनाव से राहत मिलती है, साथ ही स्मरणशक्ति भी बढ़ती है।
10.सौंदर्य- त्वचा और बालों के सौंदर्य में भी दालचीनी पीछे नहीं है। यह त्वचा को निखारने के साथ ही झुर्रियों को भी कम करती है। दालचीनी पाउडर में नीबू के रस में मिलाकर लगाने से मुंहासे व ब्लैकहैड्स दूर होते हैं। एक नीबू के रस में दो बड़े चम्मच जैतून का तेल, एक कप चीनी, आधा कप दूध, दो चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पांच मिनट के लिए शरीर पर लगाएं। इसके बाद नहा लें, त्वचा खिल उठेगी।
शहद और दालचीनी के पेस्ट को रात को सोते वक्त चेहरे पर लगाएं और सुबह गरम जल से धो लें, इससे चेहरा कांतिमय हो जाता है। गंजेपन या बालों के गिरने की समस्या के लिए गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाकर इसे सिर में लगाए और पंद्रह मिनट बाद धो लें।
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जुड़वां बच्चों की चाहत रखने वाले इसे जरुर देखे..!! How to Have Twins
जुड़वां बच्चे –
एक शौध के अनुसार 200 स्त्रियों में से सिर्फ 1 स्त्री ऐसी होती है जिसे जुड़वां बच्चे पैदा होते है. ये जुड़वां बच्चे 2 तरह के होते है. पहला – दोनों एक लिंग के और दूसरा – विपरीत लिंग के. एक लिंग के बच्चे ज्यादातर एक ही तरह के कद, शक्ल और स्वभाव के होते है किन्तु कुछ विपरीत लिंग वाले बच्चे ऐसे है जिनकी शक्ल आपस में तो क्या घर के किसी भी सदस्य से नही मिलती For More Visit https://www.healthtreatment.in
जुड़वां बच्चे दो प्रकार से होते है –
एक अण्डज / अभिन्न जुड़वां :
जब कोई स्त्री अपनी अण्डकोशिका में एक पुरुष के शुक्राणु के होने से गर्भवती होती है और जब वो शुक्राणु उसकी अण्डकोशिका में 2 कोशिकाओं में बंट जायें तो इससे उस स्त्री को जुड़वां बच्चे जन्म लेते है. जिसे एक अण्डज कहा जाता है क्योकि ये एक अंडे में एक शुक्राणु के दो हिस्सों में बाँटने की वजह से हुआ है |
ये जुडवा बच्चे स्त्री पुरुष के एक बार के सहवास क्रिया में ही हो जाते है. स्त्रियों की डिम्बाशय में हर महीने एक नये डिम्ब / अण्डकोशिका का निर्माण होता है, वहीँ पुरुष शुक्राणु अनगिनत होते है. सयोंगवश कभी कभी स्त्रियों में 2 अण्डकोशिका का प्राकृतिक रूप से निर्माण हो जाता है. जिनमे 2 अलग अलग शुक्राणु के 2 बच्चे जन्म लेते है. ये बच्चे थोड़े थोड़े समय के अंतर पर पैदा होते है.-
द्वि अण्डज / भ्रातृ जुड़वां :
जब स्त्री दो अलग अलग पुरुषो के शुक्राणु से दो अलग अलग अण्डकोशिका में शुक्राणु को निषेचित करती है तो उसके गर्भ में दो अंडे बनते है जिससे उसे जुडवा बच्चे पैदा होते है. जिसे द्वि अण्डज कहा जाता है क्योकि इसमें 2 अलग शुक्राणु के 2 अलग अंडे बनते है.
क्योकि अभिन्न जुडवा एक ही शुक्राणु के दो हिस्सों में बटने की वजह से होते है तो इनकी शक्ल, कद और स्वभाव भी समान होते है किन्तु भ्रातृ जुडवा अलग अलग अंडे में होने की वजह से एक दुसरे से अलग होते है, जिससे इनकी आदते और शक्लें एक दुसरे से नही मिलती.
जुडवा बच्चे पाने के लिए जरूरी आहार :
जब किसी स्त्री के पेट में जुडवा बच्चे होते है तो उन्हें इस बात का कई महीनो के बाद पता चलता है. इस स्थिति में पेट का आकार सामान्य से ज्यादा बड़ा हो जाता है. इसके बाद गर्भवती स्त्री जुडवा बच्चो के दिल की धड़कन को सुनकर भी इस बात का पता लगा सकती है. एक बात ध्यान रखे कि अगर किसी स्त्री को जुडवा बच्चे हो रहे है तो वो कभी भी अपने घर पर प्रसव न करायें.
अगर आप भी जुडवा बच्चे पाना चाहती है तो आप अपनी किस्मत या जीन ( Gene ) के भरोसे न बैठे क्योकि कुछ ऐसे पौष्टिक आहार भी है जो आपके इस सपने को आसानी से पूरा करने में आपकी मदद करते है. इस बात पर पूरी तरह से शौध हुई है और उसी के आधार पर हम आपको ऐसे आहारो के बारे में बता रहे है जिनके नियमित सेवन से आपको जुडवा बच्चे पैदा होने के अवसर बहुत हद तक बढ़ जाते है. ये आहार निम्नलिखित है –
1. फोलिक एसिड : जब आहार पर शौध हो रही थी तो जुडवा बच्चो के जन्म और आहार में फोलिक एसिड को साथ में रखकर देखा गया. अध्ययन में पाया गया कि फोलिक एसिड शुक्राणु को दो हिस्सों में बांटने में सहायक है जिससे अभिन्न जुडवा होने की सम्भावना बनती है तो आप अपने आहार में बींस, पालक और चुकंदर को जरुर शामिल करें. आपको जुडवा बच्चे होने के अवसर बहुत हद तक बढ़ जाते है.
2. जिमीकंद : अफ्रीका की एक जनजाति है जिसका नाम है यारुबा. इस जनजाति में देखा गया है कि इन्हें ज्यादातर जुडवा बच्चे ही पैदा होते है. इस अदभुत बात को पता लगाने के लिए शौध की गई जिसमे पाया गया कि ये अपने आहार में जिमीकंद का सबसे अधिक सेवन करते है. जिमीकंद में एक रसायन होता है जो हाइपर ओव्यूलेशन में मददगार सिद्ध होता है.
3. काम्प्लेक्स कार्बोहायड्रेट : काम्प्लेक्स कार्बोहायड्रेट से ओव्यूलेशन की क्षमता बहुत हद तक बढ़ जाती है. तो अगर आप जुडवा बच्चे चाहते हो तो आप खाने में काम्प्लेक्स कार्बोहायड्रेट को जरुर शामिल करें. जिसके लिए आप साबुत अनाज, बींस और हरी सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक करें.
4. डेरी उत्पाद : हर डेरी उत्पाद में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है. कैल्शियम न सिर्फ हड्डियों के लिए बल्कि प्रजनन प्रणाली के लिए बहुत लाभदायी होता है और इसे स्वस्थ रखता है. इसलिए जो स्त्रियाँ दूध पीती है उन्हें जुडवा बच्चे होने की 5 गुना ज्यादा सम्भावना होती है. इसलिए महिलाओं को जुडवा बच्चे पाने के लिए दूध, चीज, मक्खन, पनीर और दही का अधिक सेवन करना चाहियें.
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क्या आप जानते है.? पानी पीने से कहीं बेहतर है पानी खाना..!!
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पानी पीने से कहीं बेहतर है कि हम पानी खाएं. उनके अनुसार, पानी पीने से कहीं ज्यादा अच्छा होगा कि हम पानी से भरपूर ज्यादा से ज्यादा चीजों को खाएं. बॉडी को हाइड्रेट रखने के लिए पानी खाना शुरू करें यह पानी पीने से बेहतर है। देखा होगा आपने ऐसे लोगों को जिनके हाथ से पानी की बोतल छूटती नहीं। घूंट घूंट, सिप सिप चलता रहता है। कुछ लोग एक बार में सीधा दो से तीन गिलास गटक जाते हैं और कुछ परेशान रहते हैं यार मैं तो बहुत कम पानी पीता हूं। ये सभी वो लोग हैं जिन्हें किसी ने समझा दिया है या जिन्होंने कहीं पर पढ़ लिया है कि दिन में आठ से दस गिलास पीना चाहिए। मगर जनाब सच ये है कि पानी पीने से कहीं ज्यादा फायदेमंद और जरूरी है पानी खाना। For More Visit https://www.healthtreatment.in
हम पानी पीते हैं ताकि वो हमारी कोशिकाओं (सेल्स) तक पहुंचे। मगर जब हम खालिस पानी पीते जाते हैं तो उसकी बहुत बड़ी मात्रा कुछ ही देर बार सू सू बनकर निकल जाती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि अपनी बॉडी को हाइड्रेट रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप फल और सब्जियां खाएं। किसी फल के रूप में खाया गया पानी सीधे पिए गए पानी के मुकाबले ज्यादा देर तक बॉडी में रुका रहता है और अपना काम करता है। अब खीरे को ही ले लीजिए, उसमें करीब 96 फीसदी पानी होता है। इसमें जो पोषक तत्व होते हैं वो तो आपको मिलेंगे ही साथ में पानी भी मिलेगा।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया में एसोसिएट क्लीनिक प्रोफेसर इन मेडिसिन, डॉक्टर हॉवर्ड मुराद कहते हैं कि सही मायने में हाइड्रेशन का मतलब होता है वो पानी जो आपकी बॉडी में रुका रहता है न कि वो जो सीधा बाहर निकल जाता है। वह कहते हैं कि पानी पीना गलत नहीं है लेकिन अगर आप उसे सेल्स तक पहुंचा नहीं पा रहे हैं तो वो सीधा टॉयलेट में जाएगा और उससे बहुत फायदा नहीं पहुंचने वाला।
आप आठ गिलास पानी पी सकते हैं। शरीर में पानी पहुंचाने का ये भी एक रास्ता है। मगर इसका मतलब होगा आपके टॉयलेट के 8 चक्कर तय हो गए और आपकी सेल्स को वो फायदा भी नहीं पहुंचा जो पहुंचना चाहिए था। डॉक्टर मुराद कहते हैं कि जब हम पानी से भरा भोजन करते हैं तो हमारी बॉडी धीरे धीरे उस भोजन से पानी सोखती है।
दिनभर में हम जो पानी पीते हैं उसका एक-चौथाई हिस्सा खाने की चीजों से आता है. हालांकि हर खाने में कुछ न कुछ मात्रा में पानी मौजूद रहता ही है लेकिन जरूरी है कि आप उन चीजों को डाइट में शामिल करें जिनमें पानी की ज्यादा मात्रा हो.
फलों और सब्जियों में पानी की सबसे अधिक मात्रा होती है. फलों और सब्जियों में इतना पानी होता है कि उनके सेवन से एक गिलास पानी पीने जितना फायदा होता है.
इस बात को आप ऐसे समझ सकते हैं अगर एक कटोरी में हम तेजी से एक बाल्टी पानी डाल दें तो कटोरी कभी नहीं भरेगी लेकिन आराम से पानी डालेंगे तो कटोरी भर जाएगी। ऐसा ही बॉडी के साथ है। हम ढेर सारा पानी पीकर खुद को तसल्ली तो दे सकते हैं मगर शरीर की जरूरत को पूरा नहीं कर सकते। इसलिए आज से पानी पीने के साथ पानी खाने पर जोर दें।
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मोटापा कम करने के लिये रात में करें ये 4 जरुरी काम
आज हर पांच में से तीसरा व्यक्ति मोटापे से परेशान है। अगर आप भी कई महीनों से मोटापा घटाने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें कामयाबी हासिल नहीं कर पा रहे हैं, तो कुछ जरुरी नियमों का पालन करें।
रात को अगर आप सोने से पहले कुछ जरुरी नियमों का पालन कर लेते हैं, तो समझिये कि वजन घटाना आपके लिये चुटकियों का काम हो जाएगा। हमारा शरीर चर्बी घटाने का काम नियमित रूप से दिन और रात में करता रहता है, इसलिये नीचे दिये कुछ आसान से काम जरुर कीजियेगा, जिससे आप झट से मोटापा घटा लें। For More Visit https://www.healthtreatment.in
मिर्च का सेवन:
वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है, कि मोटापा घटाने के लिये मिर्च का सेवन करना चाहिये। सोने से पहले इसका सेवन भोजन में करें जिससे लगातार वजट घटने की प्रक्रिया चलती रहे।
ग्रीन टी पियें:
रात को सोने से पहले ग्रीन टी पीने पर शरीर का मैटाबॉलिज्म बढ़ता है, जिससे रातभर आपका वजन कम होता रहता है ।
शक्कर और स्टार्च ना खाएं:
शक्कर और स्टार्च कार्ब्स होते हैं, जो कि इंसुलिन के निकलने की प्रक्रिया को उत्तेजित कर देते हैं। इंसुलिन शरीर में मुख्य फैट स्टोरेज हार्मोन होता है। जब इंसुलिन की मात्रा कम रहती है, तब शरीर उसमें जमा फैट को बर्न करना शुरु कर देता है, इसलिये रात को कार्ब न खाएं।
पूरी नींद लें:
खराब नींद आपके वजन को बढ़ा कर मोटापे का शिकार बना सकती है। सोने से पहले कुछ रिलैक्सेशन टेक्नीक का इस्तमाल करें, जैसे ध्यान, सुकून भरा संगीत सुने, गरम पानी से स्नान, आदि। अच्छी नींद लेने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और फैट बर्न होता है। सोने से शरीर का हार्मोन कंट्रोल होता है जिस से बार बार भूख नही लगती और शरीर की ऊर्जा भी नहीं घटती।
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'सुहागरात' शब्द सामने आते ही युवक-युवतियों के दिलोदिमाग में तरह-तरह की कल्पनाएं उड़ान भरने लगती हैं. किशोरावस्था पार करते न करते, हर मन में इससे जुड़े खयाल आने लगते हैं. इस सोच में कुछ भी गलत नहीं है. गलतियों की शुरुआत तब होती है, जब सुहागरात के मौके पर ही कुछ लोग ऐसा कर गुजरते हैं, जिससे उन्हें हसीन लम्हों में आनंद से वंचित होना पड़ जाता है.
आगे ऐसी 10 गलतियों की चर्चा की गई है, जिससे दूर रहकर सुहागरात और आगे के दांपत्य जीवन में रस घो1. बिना पार्टनर की सहमति के सेक्स न करें
अधिकतर मामलों में लोग सुहागरात को सेक्स करना चाहते हैं, पर ऐसा जरूरी नहीं है कि उसी रात सेक्स संबंध कायम किया जाए. जब दोनों ही इसके लिए राजी हों, तभी वैसा करें. अगर दोनों में से कोई भी किसी वजह से सेक्स करने के लिए तैयार न हो, तो इसके लिए जोर-जबरदस्ती कतई न करें.
2. यौन संबंध बनाने में हड़बड़ी न दिखाएं
आम तौर पर सुहागरात से पहले युवक-युवतियों को एक-दूसरे के शरीर की ठीक तरह से जानकारी नहीं होती है. जब वे पहली बार खुला जिस्म देखते हैं, तो संयम खोकर इस काम में हड़बड़ी करने लगते हैं. इस वजह से वे उस सुख से वंचित रह जाते हैं, जिसकी उन्हें दरकार होती है. बिना फोरप्ले किए कोई भी लड़की यौन क्रीड़ा के लिए जिस्मानी तौर पर तैयार नहीं होती है.
3. रक्तस्राव की आशंका से घबराएं नहीं
सुहागरात चाहे किसी महिला के लिए सेक्सुअल रिलेशन का पहला ही अनुभव क्यों न हो, रक्तस्राव कतई जरूरी नहीं है. आम तौर पर Hymen (एक तरह की झिल्ली) किसी अन्य शारीरिक काम के दौरान पहले ही नष्ट हो गई होती है, इसलिए रक्तस्राव की आशंका से डरना गलत है.
4. अपने जीवनसाथी पर शक न करें
कई बार लोग सुहागरात को अपने जीवनसाथी को शक भरी निगाहों से देखते हैं. इससे उन हसीन लम्हों का मजा तो किरकिरा होता ही है, रिश्ते की बुनियाद भी कमजोर पड़ जाती है. बेहतर यह होता है कि दोनों एक-दूसरे के अतीत की बातें न कुरेदकर, जो जीवन सामने है, उसे सजाने-संवारने की कोशिश करें.
5. आकार से सेक्सुअल पावर का अंदाजा न लगाएं
यह सोचना सरासर है कि पुरुष के लिंग के आकार से सेक्सुअल पावर का पता लगाया जा सकता है. कामक्रीड़ा का आनंद जोड़ों के खुशनुमा मानसिक नजरिए और जिंदादिली पर निर्भर है. आकार न के बराबर असर डालता है. सेक्सुअल पावर लिंग के आकार पर निर्भर नहीं करता है. सुहागरात पर इस तरह का कोई तनाव न पालें.
6. शराब आदि का सेवन न करें
कुछ युवकों की सोच होती है कि अगर वे सुहागरात को शराब आदि का सेवन कर लेंगे, तो उनके भीतर जोश पैदा हो जाएगा. यह सोच गलत है. जोश के लिए सही मानसिक नजरिया ही काफी होता है. शराब की गंध और बहके हुए व्यवहार से जीवनसाथी को तकलीफ उठानी पड़ सकती है.
7. कंडोम के इस्तेमाल पर बात कर लें
बेहतर होगा कि दोनों बातचीत करके यह पहले ही तय कर लें कि सेक्स के वक्त कंडोम का इस्तेमाल करना है नहीं. अगर बच्चे पैदा करने की फिलहाल कोई योजना न हो, कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें.
8. पीरियड्स की डेट न भूलें
पीरियड्स की डेट भूलने पर लड़कियों को शादी और सुहागरात के दौरान तकलीफ उठानी पड़ सकती है. साथ ही जो लड़के सुहागरात पर संबंध कायम करने को आतुर रहते हैं, उन्हें निराश होना पड़ सकता है. इसका उपाय यह है कि डेट मैच करने पर पहले से ही डॉक्टर की सलाह से वैसी गोलियां ले लें, जिनसे डेट को कुछ दिन आगे बढ़ाना मुमकिन है.
9. शरीर की साफ-सफाई को नजरअंदाज न करें
पहले-पहल सेक्स के दौरान शरीर की ठीक तरीके से साफ-सफाई का खयाल जरूर रखें. शारीरिक आकर्षण के लिए डियो आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है. पहली बार कोई ऐसी कोर-कसर न छोड़े, जिससे शरीर के प्रति पार्टनर के मन में किसी तरह की अरुचि पैदा हो.
10. यह केवल दो जिस्मों का मिलन भर नहीं है
सुहागरात को केवल दो जिस्मों का मिलन मानना भारी भूल होगी. यह वो सुनहरा अवसर होता है, जब एक-दूसरे से भावनात्मक तौर पर अच्छी तरह जुड़ा जा सकता है. इस मौके पर व्यवहार में सौम्यता बरतकर पार्टनर के दिल पर गहरी छाप छोड़ी जा सकती है.
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